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Wednesday, March 4, 2009

कोई अफ़सोस न पाला करिये...! /दीपक तिरुवा


कोई अफ़सोस पाला करिये

सारे अरमान निकाला करिये॥

दिल ने क्यों शोर किया है इतना,

घर
के बच्चे को सम्हाला करिये॥

कच्ची
दीवारें ,सूख जाने दो

याद
पे ज़ोर न डाला करिये॥

फिर कोई ख्वाब चला आयेगा ,

स्याह
रातों में उजाला करिये॥

एक
सैलाब लिये बैठा हूँ

मुझ
पे कंकर उछाला करिये॥

3 comments:

"अर्श" said...

bahot khub sahab... bahot hi badhiya bhav ke sath khubsurat gazal....


arsh

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

प्रीत को दिल में,
सम्भाला करिए।
काली रातों में,
उजाला भरिये।
जिन्दगी के उदास,
मधुबन में,
कुछ नए राग,
निकाला करिए।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...
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